फोटो से वशीकरण के टोटके/उपाय जो करते हैं दुश्मन का नाश

दुश्मन पर वशीकरण कैसे करे जाने गुरु जी के साथ घर बैठे

दुश्मन को वश में करने का वशीकरण मंत्र

“ज्ञानी न मपि चेतांसि देवी भगवती हिंसा ग्रहा बलादा कृष्य मोहाय महामाया परयकस्टी ”

दुश्मन को वश में करने विधि

शनिवार को जल्दी सुबह नहाकर माँ काली के मंदिर में जाये |दो नींबू ले कर शांत जगह पर जाये |एक नींबू पर अपना नाम लिखे एवं दुसरे नींबू पर उसका जिसे आप वश में करना चाहते है |एक खाली पेपर पर 21 बार अपने शत्रु का नाम लिख दे |अब नींबू को नाम लिखे हुए पेपर पर रख दे अब 21 बार मंत्र का उच्चारण करे |अब नींबू को निकाल कर काट ले और उसके रस को पि ले |अगले दिन पेपर और दुसरे नींबू को बहते हुए पानी में बहा दे |अगले दिन फिर मंत्र का 11 बार उच्चारण करे |इस विधि को इस तरह से करने पर आप अपने दुश्मन को अपने वश में करके उस से निजात पा सकते है |

फोटो से वशीकरण के टोटके/उपाय जो करते हैं दुश्मन का नाश

शत्रुओं से मुक्ति के लिए माँ बगलामुखी साधना

इस साधना को करने के लिए साधक को केवल पीले वस्त्र ही धारण करने चाहिए। पीले वस्त्र पहनकर पीले आसन पर ही बैठना चाहिए। पीले वस्त्रों के साथ पूजा की प्रत्येक सामग्री भी पीले रंग की होनी चाहिए

इसके पश्चात माता का चित्र, बगलामुखी यंत्र, कलश एवं अखंड दीपक स्थापित करें। माता बगलामुखी के भैरव मृत्युंजय हैं। इसलिए साधना के आरंभ में महामृत्युंजय की एक माला एवं बगला कवच का पाठ करना चाहिए।

यदि किसी छोटे कार्य के लिए साधना करनी हो तो 10,000 बार या फिर इससे बड़े कार्य के लिए एक लाख बार मां बगलामुखी के मंत्र का जाप करना चाहिए

साधना को सम्पन्न करने के लिए मां के इस मंत्र का जाप करें- ‘‘ऊँ ह्रीं बगलामुखि सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय हृीं ऊँ स्वाहा।।’’

इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि जब आप तक देवी बगलामुखी की साधना कर रहे हैं, तब तक इस बात की चर्चा किसी से भी ना करें।

यह मान्यता है कि देवी बगलामुखी की साधना करते समय साधकों को कई प्रकार की विचित्र आवाजें सुनाई देती हैं

कमजोर दिल वाले या फिर पारालौकिक ताकतों से भयभीत होने वाले लोगों को यह साधना ना करने की सलाह दी जाती है

देवी बगलामुखी के मंत्रों का जाप शुक्ल पक्ष में ही करें तो ज्यादा सफल साबित होता है

बगलामुखी साधना के लिए नवरात्रि सबसे उपयुक्त समय माना जाता है

साधना के दौरान उत्तर दिशा की ओर देखते हुए बैठना चाहिए

साधना करते समय आसपास घी और तेल के दिए जलाना सही माना जाता है

अगर आपको लगता है कि आप पर किसी टोने का साया है या फिर आपको शत्रुओं से किसी भी प्रकार का भय है तो आप इस साधना का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन मात्र अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए यदि इस साधना का प्रयोग किया जाए तो यह उचित नहीं कहा जाएगा। कुछ लोग अपने लाभ के लिए दूसरों पर यह साधना आजमाते हैं, जो स्वयं उनके लिए संकट का कारण बन सकता है।

शत्रु को पीड़ित करने का उपाय

अश्विनी नक्षत्र में चार अंगुल लंबी किसी घोड़े की हड्डी लें, तथा ‘ऊँ हुँ हुँ फट्‍ स्वाहा।‘ मंत्र का जाप करें| एक लाख जाप के बाद यह मंत्र सिद्ध हो जाता है| जिस दिन प्रयोग करना हो, वही हड्डी लेकर 21 बार इस मंत्र का जाप करें, फूँक मारें तथा शत्रु के घर के सामने गाड़ दें| शत्रु का विनाश निश्चित है|

एक लाख बार ‘. ऊँ डं डां डिं डीं डु डू डें डैं डों डौं डं ड:। अमुकस्य हन स्वाहा। ‘ मंत्र जाप करने से सिद्ध हो जाता है| प्रयोग करते समय चार अंगुल मानव हड्डी लेकर 108 बार इस मंत्र का जाप कर इसे अभिमंत्रित करें तथा श्मशान भूमि में गाड़ दें| शत्रु नष्ट हो जाएगा|

एकांत में रात के समय किसी दीवार पर अपने शत्रु का चित्र बनाएँ, श्मशान का जलता कोयला पास में रखें तथा निम्नलिखित मंत्र का जाप 1008 बार करें –

  1. ॐ नमो आदेश गुरु का। हनुमंत बलवन्ता।
  2. माता अंजनी का पूत। हल हलन्ता।
  3. आओ चढ़ चढन्ता। आओ गढ़ किला तोड्न्ता।
  4. आओ लंका जलनता बालनता भस्म क्रंता। आओ ले लागूं लंगूर।
  5. ते लिपटाये सुमिरते पटका। औ चंदी चन्द्रावली भवानी।
  6. मिल गावें मंगलाचार। जीते राम लक्ष्मण।
  7. हनुमान जी आओ। आओ जी तुम आओ।
  8. सात पान का बीड़ा चाबत। मस्तक सिंदूर चढ़ाये आओ।
  9. मंदोदरी सिंहासन डुलाते आओ। यहां आओ हनुमान।
  10. आया जागते नरसिंह। आया आगे भैरों किल्किलाय।
  11. ऊपर हनुमंत गाजै। दुर्जन को फाड़।
  12. अमुक (दुश्मन का नाम ) को मार संहार। हमारे सतगुरु।
  13. हम सतगुरु के बालक। मेरी भक्ति।
  14. गुरु की शक्ति। फुरे मंत्र ईश्वरोवाचा।
  15. जाप पूर्ण होने के बाद श्मशान का कोयला शत्रु-आकृति के जिस अंग पर रखेंगे, शत्रु का वह अंग जलेगा| इस उपाय को कभी भी दुर्भावना से प्रेरित होकर न करें अन्यथा अनिष्ट की संभावना रहती है|

 

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