राहू की दशा के उपाय/प्रभाव/निवारण

ज्योतिष शास्त्र में शनि के बाद राहु दूसरा ऐसा ग्रह है, जो सबसे अधिक भयभीत करता है। हालांकि कम लोगों को ही इस बात की जानकारी है कि शनि क्रूर नहीं न्याय प्रिय हैं। यदि आपके कर्म सही हैं तो वह आपको दुख नहीं पहुंचाते हैं। लेकिन राहु के साथ ऐसा नहीं है। इसकी दशा हर हाल में जातक को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में इसके बुरे प्रभावों से बचने के लिए हर रात को यह आसान उपाय जरूर करें… साथ ही बाकि के दो तरीकों से घर और बच्चों की सुरक्षा बढ़ाएं

अपना अस्तित्व ना होने के कारण कुंडली में राहु-केतु का प्रभाव अन्य ग्रहों की स्थितियों के आधार पर ही होता है, लेकिन इसकी महादशाएं व्यक्ति के लिए बेहद कष्टकारक होती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये बुद्धि का ग्रह माने जाते हैं, इसलिए इसके प्रभावों से व्यक्ति के साथ जो भी बुरा होता है उसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार होता है।

कुंडली में राहु-केतु की दशाये

कुंडली देखकर व्यक्ति के जीवन में राहु-केतु की दशाओं और महादशाओं के बारे में जाना जा सकता है, लेकिन डेली लाइफ में भी आपको इससे पीड़ित होने के कई लक्षण मिलते हैं। इन्हें पहचानकर इनसे बचने के उपाय करते हुए आप इसके कष्टों से बच सकते हैं। आगे हम इसकी चर्चा कर रहे हैं।

राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करें

राहू की दशा के उपाय/प्रभाव/निवारण
राहू की दशा के उपाय/प्रभाव/निवारण

रोज रात को सोने से पहले आप गुनगुने पानी में नमक मिलाकर हाथ-पैर धोकर सोएं। ऐसा करने से राहु शांत होता है और अनावश्यक कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही नमक शरीर का दर्द दूर करता है और तनाव मुक्त रखता है। इससे आप रात को चैन की नींद सो पाएंगे और सुबह फालतू परेशानियों से दूर रह पाएंगे।

1 अगर आपके जन्मांक में राहु, चंद्र, सूर्य को दूषित कर रहा है तो जातक को भगवान शिवशंकर की सच्चे मन से आराधना करना चाहिए।

2 सोमवार को व्रत करने से भी भगवान शिवशंकर प्रसन्न होते हैं। अतः सोमवार को शिव आराधना पूजन व्रत करने के पश्चात, शाम को भगवान शिवशंकर को दीपक लगाने के पश्चात्‌ सफेद भोजन खीर, मावे की मिठाई, दूध से बने पदार्थ ग्रहण करना चाहिए।

3 भगवान भोले शंकर भक्त की पवित्र श्रद्धा पूर्ण आराधना से तत्काल प्रसन्न होने वाले देव है।

4 अतः बगैर ढोंग दिखावे के निर्मल हृदय से सच्ची आस्था के साथ भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए।

5 राहु महादशा में सूर्य, चंद्र तथा मंगल का अंतर काफी कष्टकारी होता है, अतः समयावधि में नित्य प्रतिदिन भगवान शिव को बिल्व पत्र चढ़ाकर दुग्धाभिषेक करना चाहिए।

6 जातक को शिव साहित्य जैसे- शिवपुराण आदि का पाठ करना चाहिए।

7 ॐ नमः शिवाय मंत्र का नाम जाप लगातार करते रहना चाहिए।

8 राहु की महादशा अथवा अंतर प्रत्यंतर काफी कष्टकारी हों तब भगवान शिव का अभिषेक करवाना चाहिए।

9 भगवान शिव की प्रभु श्रीराम के प्रति परम आस्था है, अतः राम नाम का स्मरण भी राहु के संकटों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।

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